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मीर ताहिर अली रिज़वी

1840 - 1911 | फ़र्रूख़ाबाद, भारत

शेर 1

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा

उस को छुट्टी मिली जिस को सबक़ याद हुआ

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चित्र शायरी 1

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा उस को छुट्टी न मिली जिस को सबक़ याद हुआ

 

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