मिर्ज़ा शारिक़ लाहरपुरी
ग़ज़ल 4
अशआर 1
क़त्ल अमीर-ए-शहर का लाडला बेटा कर गया
जुर्म मगर ग़रीब के लख़्त-ए-जिगर के सर गया
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere