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मोहसिन नक़वी

1947 - 1996 | मुल्तान, पाकिस्तान

लोकप्रिय पाकिस्तानी शायरी, कम उम्र में देहांत।

लोकप्रिय पाकिस्तानी शायरी, कम उम्र में देहांत।

ग़ज़ल 44

नज़्म 21

शेर 28

हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद कर दे

तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर

कौन सी बात है तुम में ऐसी

इतने अच्छे क्यूँ लगते हो

तुम्हें जब रू-ब-रू देखा करेंगे

ये सोचा है बहुत सोचा करेंगे

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पुस्तकें 11

Azab-e-Deed

 

 

Band-e-Qaba

 

1984

Band-e-Qaba

 

 

Barg-e-Sahra

 

1985

Ghair Matbua Kalam

 

 

हक़ इलिया

 

2003

Khema-e-Jan

 

 

Reza-e-Harf

 

 

Rida-e-Khwab

 

1985

Tulu-e-Ashk

 

 

चित्र शायरी 4

आप की आँख से गहरा है मिरी रूह का ज़ख़्म आप क्या सोच सकेंगे मिरी तन्हाई को मैं तो दम तोड़ रहा था मगर अफ़्सुर्दा हयात ख़ुद चली आई मिरी हौसला-अफ़ज़ाई को लज़्ज़त-ए-ग़म के सिवा तेरी निगाहों के बग़ैर कौन समझा है मिरे ज़ख़्म की गहराई को मैं बढ़ाऊँगा तिरी शोहरत-ए-ख़ुश्बू का निखार तू दुआ दे मिरे अफ़्साना-ए-रुसवाई को वो तो यूँ कहिए कि इक क़ौस-ए-क़ुज़ह फैल गई वर्ना मैं भूल गया था तिरी अंगड़ाई को

 

वीडियो 18

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a mushaira

मोहसिन नक़वी

Mohsin Naqvi Shaheed explains the personality of Ghazi Abbbas poetry and Musaib

मोहसिन नक़वी

Reciting marsiya

मोहसिन नक़वी

ऑडियो 12

अगरचे मैं इक चटान सा आदमी रहा हूँ

अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था

कठिन तन्हाइयों से कौन खेला मैं अकेला

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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