मुग़नी तबस्सुम के शेर
छुपा रक्खा था यूँ ख़ुद को कमाल मेरा था
किसी पे खुल नहीं पाया जो हाल मेरा था
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere