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मुनीर शिकोहाबादी

1814 - 1880 | रामपुर, भारत

प्रसिद्ध क्लासिकी शायर जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया

प्रसिद्ध क्लासिकी शायर जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया

मुनीर शिकोहाबादी

ग़ज़ल 56

शेर 117

आँखें ख़ुदा ने बख़्शी हैं रोने के वास्ते

दो कश्तियाँ मिली हैं डुबोने के वास्ते

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सुर्ख़ी शफ़क़ की ज़र्द हो गालों के सामने

पानी भरे घटा तिरे बालों के सामने

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जाती है दूर बात निकल कर ज़बान से

फिरता नहीं वो तीर जो निकला कमान से

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एहसान नहीं ख़्वाब में आए जो मिरे पास

चोरी की मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं है

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बोसा होंटों का मिल गया किस को

दिल में कुछ आज दर्द मीठा है

रुबाई 9

पुस्तकें 6

जंग-ए-अाज़ादी 1857 का मुज़ाहिद शायर

मीर मोहम्मद इस्माईल हुसैन मुनीर सिकोहाबादी

2006

Kulliyat-e-Muneer

 

1853

मुनीर शिकोहाबादी

इंतिख़ाब-ए-कलाम

1982

मुंतख़ब-उल-आलम

 

1848

Muntakhab-ul-Aalam

 

1848

Tanqeed

Munir Shikohabadi Number : Shumara Number-001-003

1962

 

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