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मुस्तफ़ा ज़ैदी

1929 - 1970 | कराची, पाकिस्तान

तेग़ इलाहाबादी के नाम से भी विख्यात, पाकिस्तान में सी एस पी अफ़सर थे, रहस्यमय हालात में क़त्ल किए गए।

तेग़ इलाहाबादी के नाम से भी विख्यात, पाकिस्तान में सी एस पी अफ़सर थे, रहस्यमय हालात में क़त्ल किए गए।

मुस्तफ़ा ज़ैदी

ग़ज़ल 33

नज़्म 43

अशआर 24

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो

मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है

इस तरह होश गँवाना भी कोई बात नहीं

और यूँ होश से रहने में भी नादानी है

इश्क़ इन ज़ालिमों की दुनिया में

कितनी मज़लूम ज़ात है दिल

मैं किस के हाथ पे अपना लहू तलाश करूँ

तमाम शहर ने पहने हुए हैं दस्ताने

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
पहला पत्थर

सबा हमारे रफ़ीक़ों से जा के ये कहना मुस्तफ़ा ज़ैदी

फ़नकार ख़ुद न थी मिरे फ़न की शरीक थी

मुस्तफ़ा ज़ैदी

मुसाफ़िर

मिरे वतन तिरी ख़िदमत में ले कर आया हूँ मुस्तफ़ा ज़ैदी

मिरी पत्थर आँखें

अब के मिट्टी की इबारत में लिखी जाएगी मुस्तफ़ा ज़ैदी

ऑडियो 4

किसी और ग़म में इतनी ख़लिश-ए-निहाँ नहीं है

आख़िरी बार मिलो

कहानी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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