Naseem Sahar's Photo'

नसीम सहर

1944

ग़ज़ल 11

नज़्म 1

 

शेर 9

दिये अब शहर में रौशन नहीं हैं

हवा की हुक्मरानी हो गई क्या

आवाज़ों की भीड़ में इतने शोर-शराबे में

अपनी भी इक राय रखना कितना मुश्किल है

कभी तो सर्द लगा दोपहर का सूरज भी

कभी बदन के लिए इक करन ज़ियादा हुई

ई-पुस्तक 2

Nazish-e-Maharashtara

Nusrat: Fan Aur Shakhsiyyat

2017

Raushandan Mein Chidya

 

1991