Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Nashir Naqvi's Photo'

नाशिर नक़वी

1956 | पटियाला, भारत

नाशिर नक़वी

ग़ज़ल 24

नज़्म 7

अशआर 4

सफ़र का ख़ात्मा होता नहीं कहीं अपना

हर इक पड़ाव से इक इब्तिदा निकलती है

  • शेयर कीजिए

सफ़र का ख़ात्मा होता नहीं कहीं अपना

हर इक पड़ाव से इक इब्तिदा निकलती है

  • शेयर कीजिए

जाने कब कौन से लम्हे में ज़रूरत पड़ जाए

तुम हमारे लिए पहले से दुआ कर रखना

  • शेयर कीजिए

जाने कब कौन से लम्हे में ज़रूरत पड़ जाए

तुम हमारे लिए पहले से दुआ कर रखना

  • शेयर कीजिए

उस के करम का एक सहारा जो मिल गया

फिर उम्र भर किसी की ज़रूरत नहीं हुई

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 36

"पटियाला" के और शायर

 

Recitation

बोलिए