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नावक हमज़ापुरी

टांडा, भारत

आगे पीछे रख नज़र ज़ाहिर बातिन भाँप

ग़ाफ़िल पा कर डस ले आस्तीन का साँप

मैं हूँ लौह-ए-वजूद पर ऐसा एक सवाल

चुप हैं मेरे जवाब में रोज़ महीने साल

उल्फ़त करना दिल लगी तर्क-ए-मोहब्बत खेल

जो समझे वो इश्क़ के इम्तिहान में फ़ेल