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नज़र हैदराबादी

1919 - 1963 | कराची, पाकिस्तान

नज़र हैदराबादी

ग़ज़ल 4

 

नज़्म 1

 

अशआर 2

इसी ख़याल में हर शाम-ए-इंतिज़ार कटी

वो रहे हैं वो आए वो आए जाते हैं

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इस चश्म-ए-सियह-मस्त पे गेसू हैं परेशाँ

मय-ख़ाने पे घनघोर घटा खेल रही है

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पुस्तकें 8

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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