Nazeer Baaqri's Photo'

नज़ीर बाक़री

संभल, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 12

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए

सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को

ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को

सोचता हूँ कि कहूँ तुझ से मगर जाने दे

इस लिए चल सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर

मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रक्खी थी

संबंधित शायर

  • अक़ील नोमानी अक़ील नोमानी समकालीन

"संभल" के और शायर

  • अज़ीज़ बानो दाराब  वफ़ा अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
  • सय्यद अमीन अशरफ़ सय्यद अमीन अशरफ़
  • अब्दुल अहद साज़ अब्दुल अहद साज़
  • मुसव्विर सब्ज़वारी मुसव्विर सब्ज़वारी
  • अर्श मलसियानी अर्श मलसियानी
  • अरशद अली ख़ान क़लक़ अरशद अली ख़ान क़लक़
  • ग़ुलाम मुर्तज़ा राही ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
  • शमीम करहानी शमीम करहानी
  • हफ़ीज़ जौनपुरी हफ़ीज़ जौनपुरी
  • शबनम अशाई शबनम अशाई