नाज़िर वहीद

ग़ज़ल 6

अशआर 2

रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के

एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें

मुझ से ज़ियादा कौन तमाशा देख सकेगा

गाँधी-जी के तीनों बंदर मेरे अंदर

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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