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नज़्म तबातबाई

1854 - 1933 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 26

नज़्म 5

 

शेर 20

बिछड़ के तुझ से मुझे है उमीद मिलने की

सुना है रूह को आना है फिर बदन की तरफ़

नशा में सूझती है मुझे दूर दूर की

नद्दी वो सामने है शराब-ए-तुहूर की

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बनाया तोड़ के आईना आईना-ख़ाना

देखी राह जो ख़ल्वत से अंजुमन की तरफ़

पुस्तकें 13

दीवान-ए-ग़ालिब तबातबाई

 

 

Deewan-e-Tabatabai

 

1933

दीवान-ए-तबातबाई

सौत-ए-तग़ज़ुल

1933

इसलाहात-ए-ग़ालिब

 

1966

Marasi Anees

Volume-002

1936

मरासी-ए-अनीस

Volume-003

1935

Marasi-e-Anees

Volume-002

1924

Nazm Tabatabai

भाग-001

 

Nazm Taba-Tabai: Hayat Aur Karnamon Ka Tanqeedi Mutala

 

1973

Sharah Deewan-e-Urdu-e-Ghalib

 

1961

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