Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
noImage

नज़्मी सिकंदराबादी

1930 | दिल्ली, भारत

नज़्मी सिकंदराबादी

ग़ज़ल 8

अशआर 2

नसीब होंगी उसे कामयाबियाँ 'नजमी'

ख़ुशी के साथ जो हर इम्तिहाँ से गुज़रेगा

डरेंगे लोग वफ़ा के ख़याल से 'नज़मी'

मिरी वफ़ाओं का जिस दिन सिला मिलेगा मुझे

 

पुस्तकें 2

 

"दिल्ली" के और शायर

Recitation

बोलिए