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नूह नारवी

1878 - 1962

अपने बेबाक लहजे के लिए विख्यात / ‘दाग़’ दहलवी के शागिर्द

अपने बेबाक लहजे के लिए विख्यात / ‘दाग़’ दहलवी के शागिर्द

ग़ज़ल 82

शेर 89

अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया

हज़ारों आफ़तें ले कर हसीनों पर शबाब आया

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हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं

पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं

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सुनते रहे हैं आप के औसाफ़ सब से हम

मिलने का आप से कभी मौक़ा नहीं मिला

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ई-पुस्तक 4

Ejaz-e-Nooh

 

 

Ejaz-e-Nooh

 

 

कलाम-ए-हिज्र

 

1914

Naghma-e-Aatshin

 

 

 

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आप जिन के क़रीब होते हैं

अज्ञात

आप जिन के क़रीब होते हैं

अज्ञात

आप जिन के क़रीब होते हैं

अज्ञात

आप जिन के क़रीब होते हैं

अज्ञात

आप जिन के क़रीब होते हैं

अज्ञात

आप जिन के क़रीब होते हैं

पंकज उदास

कूचा-ए-यार में कुछ दूर चले जाते हैं

भारती विश्वनाथन

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