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नूर क़ुरैशी

शेर 5

गो आबले हैं पाँव में फिर भी रहरवो

मंज़िल की जुस्तुजू है तो जारी रहे सफ़र

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जो किताबों में मिल नहीं सकती

दोस्तो ऐसी दास्ताँ हैं हम

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गाहे-गाहे अगर ख़ुशी मिलती

ग़म का इतना असर नहीं होता

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