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नुशूर वाहिदी

1912 - 1983 | कानपुर, भारत

ग़ज़ल 55

नज़्म 6

शेर 31

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की

मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई

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दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है

चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है

the lamp's extinguised but someone's heart

the lamp's extinguised but someone's heart

हज़ार शम्अ फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए

नज़र नहीं तो अंधेरा है आदमी के लिए

ई-पुस्तक 29

Aatish-o-Nam

 

1984

Ashk-e-Chakan Se Asr-e-Rawan Tak

 

2000

Atish-o-Nam

 

1998

Atish-o-Nam

 

 

Azm-e-Mohkam

 

1999

Danish Akhiruzzaman

 

2009

फ़रोग़-ए-जाम

 

1969

Gul Afshani-e-Guftar

 

1977

गुल-अफ़्शानी-ए-गुफ़्तार

 

2013

Hindustan Mein Falsafa-e-Khudi Ka Irtiqa

 

1993

चित्र शायरी 5

 

वीडियो 3

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ऑडियो 9

आग़ोश-ए-रंग-ओ-बू के फ़साने में कुछ नहीं

चिलमन से जो दामन के किनारे निकल आए

नई दुनिया मुजस्सम दिलकशी मालूम होती है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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