noImage

परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़

1866 | दिल्ली, भारत

परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़

ग़ज़ल 42

शेर 39

ज़ाहिद सँभल ग़ुरूर ख़ुदा को नहीं पसंद

फ़र्श-ए-ज़मीं पे पाँव दिमाग़ आसमान पर

  • शेयर कीजिए

आबदीदा हो के वो आपस में कहना अलविदा'अ

उस की कम मेरी सिवा आवाज़ भर्राई हुई

वो ही आसान करेगा मिरी दुश्वारी को

जिस ने दुश्वार किया है मिरी आसानी को

  • शेयर कीजिए

गर आप पहले रिश्ता-ए-उल्फ़त तोड़ते

मर मिट के हम भी ख़ैर निभाते किसी तरह

  • शेयर कीजिए

आया कर के व'अदा वस्ल का इक़रार था क्या था

किसी के बस में था मजबूर था लाचार था क्या था

पुस्तकें 3

दीवान-ए-प्रवीन

 

 

दीवान-ए-प्रवीन

 

 

दीवान-ए-प्रवीन

 

1913

 

ऑडियो 5

करेंगे ज़ुल्म दुनिया पर ये बुत और आसमाँ कब तक

किसी की किसी को मोहब्बत नहीं है

न आया कर के व'अदा वस्ल का इक़रार था क्या था

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"दिल्ली" के और शायर

  • मीर तक़ी मीर मीर तक़ी मीर
  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • शाह नसीर शाह नसीर
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • दाग़ देहलवी दाग़ देहलवी
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक
  • शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
  • ख़्वाजा मीर दर्द ख़्वाजा मीर दर्द