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परवेज़ साहिर

ग़ज़ल 9

शेर 6

इतना बे-आसरा नहीं हूँ मैं

आदमी हूँ ख़ुदा नहीं हूँ मैं

वक़्त अच्छा ज़रूर आता है

पर कभी वक़्त पर नहीं आता

मेरी फ़ितरत ही में शामिल है मोहब्बत करना

और फ़ितरत कभी तब्दील नहीं हो सकती