Prem Warbartani's Photo'

प्रेम वारबर्टनी

1930 - 1979 | चंडीगढ़, भारत

ग़ज़ल 20

नज़्म 13

शेर 3

कभी खोले तो कभी ज़ुल्फ़ को बिखराए है

ज़िंदगी शाम है और शाम ढली जाए है

तुम ने लिक्खा है मिरे ख़त मुझे वापस कर दो

डर गईं हुस्न-ए-दिला-आवेज़ की रुस्वाई से

  • शेयर कीजिए

आख़िर उस की सूखी लकड़ी एक चिता के काम आई

हरे-भरे क़िस्से सुनते थे जिस पीपल के बारे में

  • शेयर कीजिए
 

क़ितआ 18

ई-पुस्तक 6

khushbu Ka Khawab

 

1976

Mera Fan Mera Lahu

 

1994

Mere Andar Ek Samundar

 

1981

 

"चंडीगढ़" के और शायर

  • चमन आहूजा चमन आहूजा
  • सुरेन्द्र पंडित सोज़ सुरेन्द्र पंडित सोज़
  • कृष्ण गोपाल मग़मूम कृष्ण गोपाल मग़मूम
  • माधव कौशिक माधव कौशिक