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रसा जालंधरी

1894 - 1977

शेर 1

ख़ुश-नसीबी में है यही इक ऐब

बद-नसीबों के घर नहीं आती

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चित्र शायरी 1

ख़ुश-नसीबी में है यही इक ऐब बद-नसीबों के घर नहीं आती