राशिद आज़र

ग़ज़ल 21

शेर 2

देखने वाले यूँ तो बहुत देखे हैं लेकिन

मर जाऊँ जो कोई तेरी अदा से देखे

जिन हाथों से बटती ख़ैरातें देखी थीं

इन आँखों से उन हाथों में कासे देखे

 

पुस्तकें 10

Aab Deeda

 

1974

Andokhta

 

1997

jam.a

 

1990

Khak-e-Ana

 

1979

मीर की ग़ज़ल-गोई

एक जाएज़ा

1991

नक़्श-ए-आज़र

 

1963

Qarz-e-Ja'n

 

2003

Sada-e-Teesha

 

1971

Sada-e-Teesha

 

1971

Sada-e-Teesha

 

1971

 

ऑडियो 16

अजीब जुम्बिश-ए-लब है ख़िताब भी न करे

तुम्हारा नाम ले कर दर-ब-दर होता रहूँगा

मुंतज़िर आँखों में जमता ख़ूँ का दरिया देखते

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"हैदराबाद" के और शायर

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