रउफ़ ख़लिश
ग़ज़ल 6
अशआर 1
बिखरते ख़्वाबों से ता'बीर के धुँदलकों तक
मुहाजरत ने कचोके बहुत लगाए हैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere