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रज़्ज़ाक़ अरशद

ग़ज़ल 4

 

शेर 2

हुए ख़त्म सिगरेट अब क्या करें हम

है पिछ्ला पहर रात के दो बजे हैं

नई फ़ज़ा में नई दोस्ती पनप सकी

घरों के बीच पुरानी अदावतें थीं बहुत

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पुस्तकें 2

सुतूर

खण्ड-002

1977