सआदत सईद
ग़ज़ल 1
नज़्म 7
अशआर 1
आँखों से वो कभी मिरी ओझल नहीं रहा
ग़ाफ़िल मैं उस की याद से इक पल नहीं रहा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere