Saleem Kausar's Photo'

सलीम कौसर

1945 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान के चर्चित शायर। अपनी ग़ज़ल ' मैं ख़याल हूँ किसी और का ' के लिए मशहूर।

पाकिस्तान के चर्चित शायर। अपनी ग़ज़ल ' मैं ख़याल हूँ किसी और का ' के लिए मशहूर।

ग़ज़ल 56

नज़्म 2

 

शेर 48

क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं

कितनी आज़ादी से हम अपनी हदों में क़ैद हैं

कहानी लिखते हुए दास्ताँ सुनाते हुए

वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

हम ने तो ख़ुद से इंतिक़ाम लिया

तुम ने क्या सोच कर मोहब्बत की

ई-पुस्तक 1

Ye Charagh Hai To Jala Rahe

 

1991

 

चित्र शायरी 5

मिलना न मिलना एक बहाना है और बस तुम सच हो बाक़ी जो है फ़साना है और बस लोगों को रास्ते की ज़रूरत है और मुझे इक संग-ए-रहगुज़र को हटाना है और बस मसरूफ़ियत ज़ियादा नहीं है मिरी यहाँ मिट्टी से इक चराग़ बनाना है और बस सोए हुए तो जाग ही जाएँगे एक दिन जो जागते हैं उन को जगाना है और बस तुम वो नहीं हो जिन से वफ़ा की उम्मीद है तुम से मिरी मुराद ज़माना है और बस फूलों को ढूँडता हुआ फिरता हूँ बाग़ में बाद-ए-सबा को काम दिलाना है और बस आब ओ हवा तो यूँ भी मिरा मसअला नहीं मुझ को तो इक दरख़्त लगाना है और बस नींदों का रत-जगों से उलझना यूँही नहीं इक ख़्वाब-ए-राएगाँ को बचाना है और बस इक वादा जो किया ही नहीं है अभी 'सलीम' मुझ को वही तो वादा निभाना है और बस

 

वीडियो 10

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Reading nazm "Taaza Khabar"

सलीम कौसर

Saleem Kausar at amushaira in 2003

सलीम कौसर

तुझ से बढ़ कर कोई प्यारा भी नहीं हो सकता

सलीम कौसर

दस्त-ए-दुआ को कासा-ए-साइल समझते हो

सलीम कौसर

मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है

सलीम कौसर

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