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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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Shaukat Fahmi's Photo'

शौकत फ़हमी

1965 | पाकिस्तान

मशहूर पाकिस्तानी शाइरों में शामिल, मुशाइरों में भी मक़बूल

मशहूर पाकिस्तानी शाइरों में शामिल, मुशाइरों में भी मक़बूल

शौकत फ़हमी

ग़ज़ल 11

अशआर 13

इक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहा

फिर यूँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई

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बदला जो वक़्त गहरी रिफ़ाक़त बदल गई

सूरज ढला तो साए की सूरत बदल गई

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आख़री बस है और निकलने वाली है

जाओ इक सीट बराबर ख़ाली है

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हमारे पास सुनाने को कुछ नहीं 'फ़हमी'

हमें तो ख़्वाब भी देखे हुए ज़माना हुआ

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ज़रा शादाब होना चाहते हैं

हमें रोने दो रोना चाहते हैं

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