शाैकत वास्ती
ग़ज़ल 60
अशआर 5
अजीब बात है दिन भर के एहतिमाम के बा'द
चराग़ एक भी रौशन हुआ न शाम के बा'द
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere