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शौक़ असर रामपुरी

रामपुर, भारत

शेर 7

मिरे ख़याल की वुसअत में हैं हज़ार चमन

कहाँ कहाँ से निकालेगी ये बहार मुझे

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अभी फ़र्क़ है आदमी आदमी में

अभी दूर है आदमी आदमी से

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वो ग़म हो या अलम हो दर्द हो या आलम-ए-वहशत

उसे अपना समझ ज़िंदगी जो तेरे काम आए

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पुस्तकें 1

Tasveerein

 

2009

 

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