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सिकंदर अली वज्द

1914 - 1983 | औरंगाबाद, भारत

सिकंदर अली वज्द

ग़ज़ल 15

शेर 7

जाने वाले कभी नहीं आते

जाने वालों की याद आती है

बहार आए तो ख़ुद ही लाला नर्गिस बता देंगे

ख़िज़ाँ के दौर में दिलकश गुलिस्तानों पे क्या गुज़री

तमीज़-ए-ख़्वाब-ओ-हक़ीक़त है शर्त-ए-बेदारी

ख़याल-ए-अज़्मत-ए-माज़ी को छोड़ हाल को देख

देर से रही है याद तिरी

क्या तुझे याद रहा हूँ मैं

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दिल की बस्ती अजीब बस्ती है

ये उजड़ने के बा'द बस्ती है

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1952

आफ़्ताब-ए-ताज़ा

 

1952

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1963

Bayaz-e-Maryam

 

1974

Bayaz-e-Maryam

 

1995

Bayaz-e-Maryam

 

1974

Intekhab

 

1977

Intikhab-e-Kalam-e-Sikandar Ali Wajd

 

1952

Intikhab-e-Kalam-e-Sikandar Ali Wajd

 

1957

Jamal-e-Ajanta Jalal-e-Himala

 

1988

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

सिकंदर अली वज्द

सिकंदर अली वज्द

ऑडियो 8

कैफ़ जो रूह पे तारी है तुझे क्या मालूम

ख़ुश-जमालों की याद आती है

ख़ुशी याद आई न ग़म याद आए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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