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सय्यद नवाब अफ़सर लखनवी

शेर 5

नुमूद-ए-सुब्ह से शब की वो तीरगी तो गई

ये और बात कि सूरज में रौशनी कम है

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अल्लाह अल्लाह ये हंगामा-ए-पैकार-ए-हयात

अब वो आवाज़ भी देते हैं तो सुनते नहीं हम

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क्या कहें बज़्म में कुछ ऐसी जगह बैठे हैं

जाम-ए-मय हादसा बन जाए तो हम तक पहुँचे

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ई-पुस्तक 2

Harf-e-Haq