Tahira Jabeen Tara's Photo'

ताहिरा जबीन तारा

1979 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 3

 

नज़्म 1

 

शेर 3

मिल के लगा है आज ज़माने ठहर गए

तुझ से बिछड़ के वक़्त गुज़ारा नहीं गया

ये आँख नम थी ज़बाँ पर मगर सवाल था

हम अपनी ज़ात में गुम थे कोई ख़याल था

सजा लिया है हथेली पे हम ने उस का नाम

इस लिए तो बिछड़ जाने का मलाल था

 

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