ग़ज़ल 17

शेर 13

हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं

अपने साथ इक शाम मनाया करते हैं

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मिरी तवज्जोह फ़क़त मिरे काम पर रहेगी

मैं ख़ुद को साबित करूँगा दावा नहीं करूँगा

सफ़र में होती है पहचान कौन कैसा है

ये आरज़ू थी मिरे साथ तू सफ़र करता

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