noImage

वज़ीर अली सबा लखनवी

1795 - 1885 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 28

शेर 56

दिल में इक दर्द उठा आँखों में आँसू भर आए

बैठे बैठे हमें क्या जानिए क्या याद आया

  • शेयर कीजिए

बात भी आप के आगे ज़बाँ से निकली

लीजिए आए थे हम सोच के क्या क्या दिल में

  • शेयर कीजिए

आप ही अपने ज़रा जौर-ओ-सितम को देखें

हम अगर अर्ज़ करेंगे तो शिकायत होगी

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 3

Ghuncha-e-Arzu

 

1847

Ghuncha-e-Arzu

 

1856

Intikhab-e-Saba

 

1982

 

संबंधित शायर

  • इमदाद अली बहर इमदाद अली बहर समकालीन
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश गुरु
  • मिर्ज़ा सलामत अली दबीर मिर्ज़ा सलामत अली दबीर सम्बन्ध

"लखनऊ" के और शायर

  • मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश
  • इमदाद अली बहर इमदाद अली बहर
  • इरफ़ान सिद्दीक़ी इरफ़ान सिद्दीक़ी
  • अज़ीज़ बानो दाराब  वफ़ा अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
  • अरशद अली ख़ान क़लक़ अरशद अली ख़ान क़लक़
  • मुनव्वर राना मुनव्वर राना
  • ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
  • रिन्द लखनवी रिन्द लखनवी
  • यगाना चंगेज़ी यगाना चंगेज़ी