Yagana Changezi's Photo'

यगाना चंगेज़ी

1884 - 1956 | लखनऊ, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

यगाना चंगेज़ी

ग़ज़ल 66

शेर 50

गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ

सुना है तेरे करम का कोई हिसाब नहीं

  • शेयर कीजिए

मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा

मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता

सब्र करना सख़्त मुश्किल है तड़पना सहल है

अपने बस का काम कर लेता हूँ आसाँ देख कर

दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है

वहम की क्या दवा करे कोई

कशिश-ए-लखनऊ अरे तौबा

फिर वही हम वही अमीनाबाद

  • शेयर कीजिए

रुबाई 31

पुस्तकें 29

Aayat-e-Wajdani

 

 

Aayat-e-Wajdani

 

1927

Aayat-e-Wajdani

 

 

अायात-ए-विज्दानी

 

1927

Aayat-e-Wijdani

 

1934

Ayat-e-Wajdani

 

1945

Ganjeena

 

 

Ghalib Shikan

 

1934

ग़ालिब शिकन अातिशा

 

1935

इंतिख़ाब-ए-कलाम-ए-यगाना चंगेज़ी

 

1988

चित्र शायरी 5

बैठा हूँ पाँव तोड़ के तदबीर देखना मंज़िल क़दम से लिपटी है तक़दीर देखना आवाज़े मुझ पे कसते हैं फिर बंदगान-ए-इश्क़ पड़ जाए फिर न पाँव में ज़ंजीर देखना मुर्दों से शर्त बाँध के सोई है अपनी मौत हाँ देखना ज़रा फ़लक-ए-पीर देखना होश उड़ न जाएँ सनअत-ए-बेहज़ाद देख कर आईना रख के सामने तस्वीर देखना परवाने कर चुके थे सर-अंजाम ख़ुद-कुशी फ़ानूस आड़े आ गया तक़दीर देखना शायद ख़ुदा-न-ख़ास्ता आँखें दग़ा करें अच्छा नहीं नविश्ता-ए-तक़दीर देखना बाद-ए-मुराद चल चुकी लंगर उठाओ 'यास' फिर आगे बढ़ के ख़ूबी-ए-तक़दीर देखना

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई दिल न माने तो क्या करे कोई

क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई दिल न माने तो क्या करे कोई

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता मुझे ऐ नाख़ुदा आख़िर किसी को मुँह दिखाना है बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता मुसीबत का पहाड़ आख़िर किसी दिन कट ही जाएगा मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता दिल-ए-बे-हौसला है इक ज़रा सी ठेस का मेहमाँ वो आँसू क्या पिएगा जिस को ग़म खाना नहीं आता सरापा राज़ हूँ मैं क्या बताऊँ कौन हूँ क्या हूँ समझता हूँ मगर दुनिया को समझाना नहीं आता

 

वीडियो 4

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
अन्य वीडियो
अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

हामिद अली

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया

अमानत अली ख़ान

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता

शिशिर पारखी

मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता

अमानत अली ख़ान

ऑडियो 14

अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता

अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या

आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"लखनऊ" के और शायर

  • मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
  • जुरअत क़लंदर बख़्श जुरअत क़लंदर बख़्श
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश
  • इमदाद अली बहर इमदाद अली बहर
  • इरफ़ान सिद्दीक़ी इरफ़ान सिद्दीक़ी
  • वलीउल्लाह मुहिब वलीउल्लाह मुहिब
  • ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
  • अज़ीज़ लखनवी अज़ीज़ लखनवी
  • वज़ीर अली सबा लखनवी वज़ीर अली सबा लखनवी
  • अरशद अली ख़ान क़लक़ अरशद अली ख़ान क़लक़