ज़फ़र हमीदी

ग़ज़ल 7

शेर 2

बादलों ने आज बरसाया लहू

अम्न का हर फ़ाख़्ता रोने लगा

जाने किस किरदार की काई मेरे घर में पहुँची

अब तो 'ज़फ़र' चलना है मुश्किल आँगन की चिकनाई में

 

पुस्तकें 10

Inekas

 

2000

Mauj-e-Ghubar

 

1983

Nawa-e-Teesha

 

 

Nawa-e-Teesha

 

 

Raqs-e-Khayal

 

 

Raqs-e-Khayal

 

 

Reza Reza

 

1926

Reza Reza

 

1926

Reza Reza

 

1976

Tuluy-e-Wajdan

 

1995

 

ऑडियो 7

अपने दिल-ए-मुज़्तर को बेताब ही रहने दो

क्यूँ मैं हाइल हो जाता हूँ अपनी ही तन्हाई में

जब भी वो मुझ से मिला रोने लगा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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