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प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/नई दिशा देने वाले शायर

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/नई दिशा देने वाले शायर

ग़ज़ल 133

शेर 154

थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते

कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते

अब के इस बज़्म में कुछ अपना पता भी देना

पाँव पर पाँव जो रखना तो दबा भी देना

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यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू मिला

किसी को हम मिले और हम को तू मिला

हास्य 4

 

पुस्तकें 22

Aab-e-Rawan

 

1978

Aas

 

1993

Ab Tak

Volume-005

2016

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-003

2006

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-002

2005

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-001

2004

अब तक-कुल्लियात-ए-ग़ज़ल

खण्ड-004

2012

Ghalib Adeebon Ki Nazar Mein

 

1988

Ghazal Universe

 

2003

Ghubar Aalood Simton Ka Suragh

 

1988

चित्र शायरी 31

बस एक बार किसी ने गले लगाया था फिर उस के बा'द न मैं था न मेरा साया था गली में लोग भी थे मेरे उस के दुश्मन लोग वो सब पे हँसता हुआ मेरे दिल में आया था उस एक दश्त में सौ शहर हो गए आबाद जहाँ किसी ने कभी कारवाँ लुटाया था वो मुझ से अपना पता पूछने को आ निकले कि जिन से मैं ने ख़ुद अपना सुराग़ पाया था मिरे वजूद से गुलज़ार हो के निकली है वो आग जिस ने तिरा पैरहन जलाया था मुझी को ताना-ए-ग़ारत-गरी न दे प्यारे ये नक़्श मैं ने तिरे हाथ से मिटाया था उसी ने रूप बदल कर जगा दिया आख़िर जो ज़हर मुझ पे कभी नींद बन के छाया था 'ज़फ़र' की ख़ाक में है किस की हसरत-ए-तामीर ख़याल-ओ-ख़्वाब में किस ने ये घर बनाया था

गुफ़्तुगू उन से रोज़ होती है मुद्दतों सामना नहीं होता

वीडियो 13

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वीडियो का सेक्शन
हास्य वीडियो
Bashir Badr at International Mushaira 2002, Houston

Dr. Basheer Badr reciting at International Mushaira 2002 organised by Aligarh Alumni Association Houston USA ज़फ़र इक़बाल

Bashir Badr reciting at Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira 2003, organized by Aligarh Alumni Association Houston, USA.

ज़फ़र इक़बाल

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

ज़फ़र इक़बाल

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

ज़फ़र इक़बाल

ऑडियो 15

ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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