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ज़ुबैर रिज़वी

1935 - 2016 | दिल्ली, भारत

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

ज़ुबैर रिज़वी

ग़ज़ल 40

नज़्म 37

अशआर 32

तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना

मिरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना

ये लम्हा लम्हा तकल्लुफ़ के टूटते रिश्ते

इतने पास मिरे कि तू पुराना लगे

पुराने लोग दरियाओं में नेकी डाल आते थे

हमारे दौर का इंसान नेकी कर के चीख़ेगा

शाम की दहलीज़ पर ठहरी हुई यादें 'ज़ुबैर'

ग़म की मेहराबों के धुँदले आईने चमका गईं

औरतों की आँखों पर काले काले चश्मे थे सब की सब बरहना थीं

ज़ाहिदों ने जब देखा साहिलों का ये मंज़र लिख दिया गुनाहों में

गीत 1

 

पुस्तकें 76

चित्र शायरी 4

 

वीडियो 19

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