ज़ुबैर शिफ़ाई
ग़ज़ल 12
अशआर 1
रात के पिछले पहर इक सनसनाहट सी हुई
और फिर एक और फिर एक और आहट सी हुई
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere