एक परिंदा चीख़ रहा है मस्जिद के मीनारे पर
दूर कहीं गंगा के किनारे आस का सूरज ढलता है
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टैग्ज़ : गंगा जमुनी तहज़ीबऔर 1 अन्य
अपना सर वो कैसे झुकाए इस सागर की चौखट पर
गंगा जी के तट पर यारो जिस जोगी का ठिकाना है