जलन शायरी

हसद एक बुरा जज़्बा है ही लेकिन शायरी में ये किस तरह अपनी सूरतें बदलता है और इश्क़ के बाब में इस की कितनी दिल-चस्प शक्लें नज़र आती हैं ये देखने के लायक़ है। दर-अस्ल शायरी में इस तरह के तमाम मौज़ूआत अपनी आम समाजी तफ़्हीम से अलग एक मानी क़ाएम करते हैं। हसद को मौज़ू बनाने वाली शायरी के इस इन्तिख़ाब को पढ़ कर आप लुत्फ़ अन्दोज़ होंगे।

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में

जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं

जौन एलिया

शब-ए-विसाल है गुल कर दो इन चराग़ों को

ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का

दाग़ देहलवी