aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
1931 - 2002 | कराची, पाकिस्तान
उर्दू के अग्रणी आधुनिक शायरों में शामिल। अपने अपारम्परिक अंदाज़ के लिए अत्यधिक लोकप्रिय
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
मैं जो हूँ 'जौन-एलिया' हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
Goya
2010
Guman
2006
Jaun Eliya Hayat Aur Shayari
Jaun Eliya-Khush Guzran Guzar Gaye
2011
Kulliyat-e-Jaun Eliya
Lekin
Mabada
Ramooz
2016
Shayad
यानी
2014
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने
जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
एक ही हादसा तो है और वो ये कि आज तक बात नहीं कही गई बात नहीं सुनी गई
आज बहुत दिन ब'अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है
तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो
हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
'जौन' दुनिया की चाकरी कर के तू ने दिल की वो नौकरी क्या की
हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई
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