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बेस्ट मुबारकबाद शायरी

अपने अज़ीज़ों को शीरीं उर्दू ज़बान में मुबारकबाद कहने के लिए देखें ये शेर

ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को

कि मैं आप का सामना चाहता हूँ

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर जन्नत को इनाम समझकर की जाने वाली भक्ति से दूरी दिखाता है। कवि कहता है कि ऐसे इनाम ज़ाहिदों को मुबारक, क्योंकि उसकी चाहत इनाम नहीं बल्कि ईश्वर की सीधी उपस्थिति है। इसमें प्रेम, साहस और अपने अस्तित्व की दृढ़ता झलकती है—तोहफ़ों से आगे, स्वयं सत्य का सामना।

Interpretation: Rekhta AI

यह शेर जन्नत को इनाम समझकर की जाने वाली भक्ति से दूरी दिखाता है। कवि कहता है कि ऐसे इनाम ज़ाहिदों को मुबारक, क्योंकि उसकी चाहत इनाम नहीं बल्कि ईश्वर की सीधी उपस्थिति है। इसमें प्रेम, साहस और अपने अस्तित्व की दृढ़ता झलकती है—तोहफ़ों से आगे, स्वयं सत्य का सामना।

अल्लामा इक़बाल

हसीन चेहरे की ताबिंदगी मुबारक हो

तुझे ये साल-गिरह की ख़ुशी मुबारक हो

अज्ञात

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक

मगर ऐसी बे-रुख़ी क्या कि सलाम तक पहुँचे

शकील बदायूनी

शहर ख़ाली है किसे ईद मुबारक कहिए

चल दिए छोड़ के मक्का भी मदीना वाले

अख़्तर उस्मान

आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है

राग है मय है चमन है दिलरुबा है दीद है

आबरू शाह मुबारक

शैख़ को जन्नत मुबारक हम को दोज़ख़ है क़ुबूल

फ़िक्र-ए-उक़्बा वो करें हम ख़िदमत-ए-दुनिया करें

अहसन मारहरवी

फिर दरमाँ का कभी नाम 'मुबारक' लेना

कुफ़्र है दर्द-ए-मोहब्बत का मुदावा करना

मुबारक अज़ीमाबादी

ज़ाहिदा ज़ोहद-ओ-रियाज़त हो मुबारक तुझ को

क्यूँ कि तक़्वा से मियाँ मेरी तो बहबूद नहीं

जुरअत क़लंदर बख़्श
बोलिए