इक़बाल की शायरी का मिज़ाज और हकार (Aspirated) व माकूसी (Retroflex) आवाज़ों से परहेज़
इस मज़मून (लेख) में इस बात का जायज़ा लिया गया है कि अल्लामा इक़बाल ने अपनी शायरी में उर्दू की भारी-भरकम हकार (Aspirated) और माकूसी (Retroflex) आवाज़ों का इस्तेमाल कितना कम किया है और इससे उनके शायरी के अंदाज़ पर क्या असर पड़ा है।