गली शायरी
दिल मुझे उस गली में ले जा कर
और भी ख़ाक में मिला लाया
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर यहाँ दिल को ऐसी ज़िद्दी ताक़त बताते हैं जो इंसान को फिर उसी जगह ले जाती है जहाँ दर्द मिला था। “मिट्टी में मिलाना” हार, अपमान और खुद को बिलकुल टूट जाने का रूपक है। भाव यह है कि चाहत रोकना मुश्किल है, और वही चाहत बार-बार गिरा भी देती है।
Interpretation:
Rekhta AI
मीर तक़ी मीर यहाँ दिल को ऐसी ज़िद्दी ताक़त बताते हैं जो इंसान को फिर उसी जगह ले जाती है जहाँ दर्द मिला था। “मिट्टी में मिलाना” हार, अपमान और खुद को बिलकुल टूट जाने का रूपक है। भाव यह है कि चाहत रोकना मुश्किल है, और वही चाहत बार-बार गिरा भी देती है।
यूँ उठे आह उस गली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर बताता है कि प्रिय की गली छोड़ना कवि के लिए जीवन छोड़ने जैसा है। “आह” दर्द की आख़िरी-सी साँस बन जाती है और “उठना” साधारण उठना नहीं, बल्कि अंतिम विदाई का संकेत है। गली प्रेम की पूरी दुनिया है; वहाँ से हटते ही सब कुछ ख़त्म-सा लगता है। भाव में वियोग, शोक और नश्वरता की गहरी छाया है।
Interpretation:
Rekhta AI
यह शेर बताता है कि प्रिय की गली छोड़ना कवि के लिए जीवन छोड़ने जैसा है। “आह” दर्द की आख़िरी-सी साँस बन जाती है और “उठना” साधारण उठना नहीं, बल्कि अंतिम विदाई का संकेत है। गली प्रेम की पूरी दुनिया है; वहाँ से हटते ही सब कुछ ख़त्म-सा लगता है। भाव में वियोग, शोक और नश्वरता की गहरी छाया है।
गली का आम सा चेहरा भी प्यारा होने लगता है
मोहब्बत में तो ज़र्रा भी सितारा होने लगता है