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अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

1948 | बेतिया, भारत

अस्सी के दशक में उभरने वाले बिहार के शायरों में शामिल

अस्सी के दशक में उभरने वाले बिहार के शायरों में शामिल

अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

ग़ज़ल 39

अशआर 10

अब चराग़ों में ज़िंदगी कम है

दिल जलाओ कि रौशनी कम है

बेवफ़ा कहिए बा-वफ़ा कहिए

दिल में आए जो बरमला कहिए

नहीं मिलती उन्हें मंज़िल जिन्हें ख़ौफ़-ए-हवादिस है

जो मौजों से नहीं डरते नदी को पार करते हैं

ज़िंदगी छोटी है सामान बहुत

और दिल के भी हैं अरमान बहुत

जिस के पैरों तले ज़मीन नहीं

उस का सारा जहान होता है

पुस्तकें 2

 

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