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अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

1948 | बेतिया, भारत

अस्सी के दशक में उभरने वाले बिहार के शायरों में शामिल

अस्सी के दशक में उभरने वाले बिहार के शायरों में शामिल

ग़ज़ल 8

शेर 10

अब चराग़ों में ज़िंदगी कम है

दिल जलाओ कि रौशनी कम है

बेवफ़ा कहिए बा-वफ़ा कहिए

दिल में आए जो बरमला कहिए

ज़िंदगी छोटी है सामान बहुत

और दिल के भी हैं अरमान बहुत

नहीं मिलती उन्हें मंज़िल जिन्हें ख़ौफ़-ए-हवादिस है

जो मौजों से नहीं डरते नदी को पार करते हैं

कहाँ शिकवा ज़माने का पस-ए-दीवार करते हैं

हमें करना है जो भी हम सर-ए-बाज़ार करते हैं

पुस्तकें 1

Ek Aag Si Seene Mein

 

2004