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अब्दुल्लाह जावेद

1931

शायर और अदीब, बच्चों के अदब के साथ साहित्यिक व सामाजिक विषयों पर आलेख भी लिखे

शायर और अदीब, बच्चों के अदब के साथ साहित्यिक व सामाजिक विषयों पर आलेख भी लिखे

ग़ज़ल 19

शेर 17

साहिल पे लोग यूँही खड़े देखते रहे

दरिया में हम जो उतरे तो दरिया उतर गया

फिर नई हिजरत कोई दरपेश है

ख़्वाब में घर देखना अच्छा नहीं

इस ही बुनियाद पर क्यूँ मिल जाएँ हम

आप तन्हा बहुत हम अकेले बहुत

तुम अपने अक्स में क्या देखते हो

तुम्हारा अक्स भी तुम सा नहीं है

जब थी मंज़िल नज़र में तो रस्ता था एक

गुम हुई है जो मंज़िल तो रस्ते बहुत

पुस्तकें 2

Bhagte Lamhe

 

2010

हिसार-ए-इमकाँ

 

2003