Adil Mansuri's Photo'

आदिल मंसूरी

1936 - 2008 | अहमदाबाद, भारत

अग्रणी आधुनिक शायार/भाषा के परम्परा-विरोधी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध/अच्छे कैलीग्राफ़र और नाटक कार भी

अग्रणी आधुनिक शायार/भाषा के परम्परा-विरोधी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध/अच्छे कैलीग्राफ़र और नाटक कार भी

ग़ज़ल 37

शेर 38

किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को

काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

क्यूँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो

तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो

मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर

उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया

चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं

बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से

कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दिया

उदासी की मेहनत ठिकाने लगी

ऑडियो 27

अब टूटने ही वाला है तन्हाई का हिसार

आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के

घूम रहा था एक शख़्स रात के ख़ारज़ार में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी समकालीन
  • मोहम्मद अल्वी मोहम्मद अल्वी समकालीन
  • नासिर शहज़ाद नासिर शहज़ाद समकालीन
  • साक़ी फ़ारुक़ी साक़ी फ़ारुक़ी समकालीन

"अहमदाबाद" के और शायर

  • मोहम्मद अल्वी मोहम्मद अल्वी
  • एहसान जाफ़री एहसान जाफ़री
  • तासीर सिद्दीक़ी तासीर सिद्दीक़ी
  • विरल देसाई विरल देसाई
  • सावन शुक्ला सावन शुक्ला
  • जयंत परमार जयंत परमार
  • रहमत अमरोहवी रहमत अमरोहवी
  • शमशेर बहादुर सिंह शमशेर बहादुर सिंह
  • जितेंद्र शर्मा जितेंद्र शर्मा
  • रशीद अफ़रोज़ रशीद अफ़रोज़