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अहसन यूसुफ़ ज़ई

दौलताबाद, भारत

ग़ज़ल 9

शेर 7

बरसात थम चुकी है मगर हर शजर के पास

इतना तो है कि आप का दामन भिगो सके

नींद को लोग मौत कहते हैं

ख़्वाब का नाम ज़िंदगी भी है

काग़ज़ की नाव हूँ जिसे तिनका डुबो सके

यूँ भी नहीं कि आप से ये भी हो सके

ई-पुस्तक 2

Tah-e-Dariya

 

1980