Ambareen Haseeb ambar's Photo'

अंबरीन हसीब अंबर

1981 | कराची, पाकिस्तान

मुशायरों की लोकप्रिय पाकिस्तानी शायरा

मुशायरों की लोकप्रिय पाकिस्तानी शायरा

अंबरीन हसीब अंबर

ग़ज़ल 24

शेर 28

फ़ैसला बिछड़ने का कर लिया है जब तुम ने

फिर मिरी तमन्ना क्या फिर मिरी इजाज़त क्यूँ

तुम ने किस कैफ़ियत में मुख़ातब किया

कैफ़ देता रहा लफ़्ज़-ए-'तू' देर तक

तअ'ल्लुक़ जो भी रक्खो सोच लेना

कि हम रिश्ता निभाना जानते हैं

मुझ में अब मैं नहीं रही बाक़ी

मैं ने चाहा है इस क़दर तुम को

अब के हम ने भी दिया तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का जवाब

होंट ख़ामोश रहे आँख ने बारिश नहीं की

पुस्तकें 2

Asaleeb

Shumara Number-005

2012

Asaleeb

Shumara Number-001

2010

 

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

अंबरीन हसीब अंबर

चराग़ घर में जला नहीं है

अंबरीन हसीब अंबर

ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबा से पहले

अंबरीन हसीब अंबर

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